News Lahar Reporter
चैत्र मास की शुक्ल नवमी का दिन… पूरे वातावरण में भक्ति की सुगंध फैली हुई थी। मंदिरों में घंटियों की गूंज, भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि और हर चेहरे पर आस्था की चमक—आज का दिन था भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का।
सुबह होते ही गाँव और शहर के लोग स्नान करके नए वस्त्र पहन मंदिरों की ओर निकल पड़े। महिलाएं घरों में पूजा की तैयारी में जुटी थीं—कलश स्थापना, फूलों की सजावट और प्रसाद की व्यवस्था। बच्चे भी उत्साहित थे, क्योंकि आज उन्हें राम जी की कहानियां सुनने को मिलती थीं।
मंदिर में पुजारी जी ने राम जन्म की कथा शुरू की—कैसे अयोध्या के राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म हुआ, कैसे उन्होंने जीवनभर सत्य, धर्म और मर्यादा का पालन किया। कथा सुनते-सुनते लोगों की आँखों में श्रद्धा के आँसू आ गए।
दोपहर ठीक 12 बजे, जब राम जन्म का समय हुआ, पूरे मंदिर में “जय श्रीराम” के जयकारे गूंज उठे। घंटियाँ बजने लगीं, शंखनाद हुआ, और मानो पूरा वातावरण दिव्य हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे स्वयं राम जी धरती पर अवतरित हो गए हों।
शाम को शोभायात्रा निकाली गई—झांकियों में राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के रूप में सजे बच्चे सबका मन मोह रहे थे। लोग रास्ते में जल और प्रसाद का वितरण कर सेवा कर रहे थे।
इस पावन दिन ने सबको एक संदेश दिया—
सत्य, धैर्य, त्याग और धर्म के रास्ते पर चलना ही जीवन की सच्ची जीत है।
✨ राम नवमी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक प्रेरणा है।

