News Lahar Reporter:
आज 3 अप्रैल को पूरी दुनिया में ईसाई समुदाय द्वारा गुड फ्राइडे मनाया जा रहा है। यह दिन ईसा मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है और इसे बेहद पवित्र व शोकपूर्ण दिन माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन उन्हें सूली (क्रूस) पर चढ़ाया गया था।
हालांकि नाम में “गुड” (अच्छा) शब्द जुड़ा है, लेकिन यह दिन खुशी का नहीं बल्कि दुख और चिंतन का प्रतीक है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस दिन को “गुड फ्राइडे” क्यों कहा जाता है?
क्यों कहा जाता है गुड फ्राइडे?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह ने मानवता के पापों के प्रायश्चित के लिए अपना बलिदान दिया था। उनका यह त्याग मानव कल्याण और मुक्ति का मार्ग माना जाता है। इसी वजह से उनके बलिदान के दिन को “गुड” यानी पवित्र और महान दिन कहा जाता है।
कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि “गुड” शब्द पुराने अंग्रेजी शब्द “God’s Friday” (भगवान का दिन) से निकला है, जो समय के साथ बदलकर “Good Friday” हो गया।
कैसे मनाया जाता है यह दिन?
इस दिन ईसाई धर्म के अनुयायी चर्चों में जाकर विशेष प्रार्थना करते हैं, उपवास रखते हैं और क्रूस के सामने श्रद्धा प्रकट करते हैं। कई जगहों पर जुलूस और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
ईस्टर से जुड़ा है संबंध
गुड फ्राइडे के तीसरे दिन ईस्टर मनाया जाता है, जिसे ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने (जी उठने) की खुशी में मनाया जाता है।
निष्कर्ष
गुड फ्राइडे भले ही शोक का दिन हो, लेकिन यह मानवता, प्रेम और त्याग का सबसे बड़ा संदेश देता है। यही कारण है कि इस दिन को “गुड” कहा जाता है, क्योंकि यह बलिदान अंततः मानव कल्याण का प्रतीक बन गया।

