NEWS LAHAR REPORTER
डुमरिया: पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया प्रखंड में प्रकृति ने अपने खूबसूरत रूप को जिस अंदाज में समेट रखा है, उसका एक शानदार उदाहरण कालियामकोचा झरना है। जंगल और पहाड़ियों के बीच मौजूद यह जलप्रपात अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खासकर सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद युवाओं का रुझान यहां की ओर बढ़ा है।
झरने तक पहुंचने का रास्ता भले ही रोमांच से भरा हो, लेकिन यहां पहुंचने के बाद पहाड़ से गिरता पानी और चारों तरफ फैली हरियाली पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। बताया जाता है कि झरने का पानी करीब 150 से 200 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। बारिश के मौसम में इसका स्वरूप और भी आकर्षक हो जाता है।
रील बनाने की होड़, सुरक्षा पर सवाल
कालियामकोचा पहुंचने वाले कई युवा झरने के आसपास फोटो, वीडियो और रील बनाने में जुटे रहते हैं। यही उत्साह कई बार जोखिम में भी बदल सकता है। चट्टानों पर काई और पानी के कारण फिसलन रहती है। थोड़ी सी चूक पर्यटकों के लिए गंभीर परेशानी खड़ी कर सकती है।
स्थानीय लोगों ने खास तौर पर झरने के ऊपरी हिस्से और तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि खूबसूरत नजारे के लिए अपनी जान जोखिम में डालना किसी भी कीमत पर सही नहीं है।
एक पुराने हादसे की याद आज भी ताजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, 2024 में सोनारी क्षेत्र के एक युवक की झरने में फिसलने के बाद मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से यहां आने वाले लोगों को लगातार सावधानी बरतने के लिए कहा जाता है। स्थानीयों का मानना है कि यदि पर्यटक निर्धारित सुरक्षित स्थानों तक ही रहें तो हादसों की आशंका को काफी कम किया जा सकता है।
आस्था से भी जुड़ा है झरना
कालियामकोचा केवल प्राकृतिक पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था से भी जुड़ा बताया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यहां देवी-देवताओं से संबंधित मान्यताएं हैं। इसी वजह से झरना क्षेत्र में शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करने और गंदगी न फैलाने की अपील की जाती है।
शाम ढलने से पहले लौटने की सलाह
घने जंगल के बीच स्थित होने के कारण स्थानीय लोगों ने पर्यटकों से शाम चार बजे तक वापस लौटने की अपील की है। उनका कहना है कि दिन ढलने के बाद जंगल के रास्ते में आवागमन मुश्किल हो जाता है और अनजान लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
कैसे पहुंचे कालियामकोचा
डुमरिया प्रखंड मुख्यालय से कालियामकोचा झरना करीब 15 किलोमीटर दूर बताया जाता है। हरिणा मंदिर से भी इसकी दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। डुमरिया-कोवाली मुख्य मार्ग पर बादलगोड़ा के पास से रास्ता लखाईडीह की ओर जाता है। यहां से करीब चार किलोमीटर अंदर जंगल की ओर जाने के बाद झरना क्षेत्र पहुंचा जा सकता है।
पर्यटन की बड़ी संभावना
कालियामकोचा झरना आने वाले समय में पूर्वी सिंहभूम के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। प्राकृतिक सुंदरता, रोमांच और शांत वातावरण यहां आने वाले लोगों को आकर्षित कर रहा है। हालांकि, पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है।
प्रकृति ने कालियामकोचा को खूबसूरती का अनमोल तोहफा दिया है—अब इसे सुरक्षित रखना पर्यटकों और स्थानीय प्रशासन, दोनों की जिम्मेदारी है।

