रांची : झारखंड आंदोलन के महानायक और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है। लोक कल्याण और जनजातीय अधिकारों की लड़ाई में उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह सम्मान प्रदान किया है। सम्मान की घोषणा के बाद पूरे झारखंड में जश्न का माहौल है। झामुमो कार्यकर्ता मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर खुशी मना रहे हैं।
शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए दशकों तक संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में चले लंबे आंदोलन का ही परिणाम था कि साल 2000 में झारखंड राज्य अस्तित्व में आया। यही वजह है कि उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है।
1973 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना की और आदिवासियों, वंचितों और मजदूरों की आवाज बुलंद की। वह तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। साथ ही, केंद्र की यूपीए सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
रामगढ़ जिले के निमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन ने 1980 से 2019 तक दुमका लोकसभा सीट का कई बार प्रतिनिधित्व किया। उनका राजनीतिक जीवन संघर्ष, आंदोलन और जनसेवा से भरा रहा। पिछले वर्ष 4 अगस्त को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
इस वर्ष घोषित पद्म पुरस्कारों में पांच लोगों को पद्म विभूषण, 13 को पद्म भूषण और 114 हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इसी क्रम में फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी पद्म भूषण दिया गया है।
दिशोम गुरु को मिला यह सम्मान झारखंड के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
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