NEWS LAHAR REPORTER
चांडिल। लंबे इंतजार के बाद चांडिल-पुरुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर पितकी रेलवे ओवरब्रिज बनकर तैयार हो गया है। 22 अगस्त को बहुप्रतीक्षित ओवरब्रिज का लोकार्पण किया जाएगा। इसके चालू होते ही पितकी रेलवे फाटक पर ट्रेनों के आवागमन के दौरान लगने वाले घंटों के जाम से हजारों लोगों को स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है। लोकार्पण समारोह में रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
🚦 घंटों के जाम से मिलेगी मुक्ति
पितकी रेलवे फाटक लंबे समय से चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर जाम की बड़ी वजह बना हुआ था। ट्रेन गुजरने के दौरान फाटक बंद होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती थी। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, मरीजों, नौकरी-पेशा लोगों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ता था।
ओवरब्रिज चालू होने के बाद वाहनों को रेलवे फाटक के बजाय सीधे ओवरब्रिज से गुजरने का रास्ता मिलेगा, जिससे आवागमन तेज और सुगम होने की उम्मीद है।
🌧️ बारिश ने रोका था काम, दोबारा बिछाना पड़ा मेटेरियल
पहले 31 जुलाई तक ओवरब्रिज को चालू करने की तैयारी थी, लेकिन लगातार बारिश ने अंतिम चरण के काम में बाधा डाल दी। ओवरब्रिज पर बिछाया गया मेटेरियल बारिश के कारण खराब हो गया, जिसके बाद उसे हटाकर दोबारा काम करना पड़ा।
बारिश थमने के बाद मेटेरियल बिछाने, कालीकरण, सुरक्षा संकेतक और अन्य जरूरी कार्य तेजी से पूरे किए गए। अब लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
🛣️ कोल्हान से बंगाल तक सफर होगा आसान
चांडिल-पुरुलिया मार्ग केवल स्थानीय आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह मार्ग जमशेदपुर, सरायकेला और चाईबासा समेत कोल्हान क्षेत्र को राज्य के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, आसनसोल और दुर्गापुर की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।
ओवरब्रिज के शुरू होने से इस पूरे कॉरिडोर पर सफर का समय कम होने और यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
🚧 तीन रेलवे ट्रैक ने बढ़ाई निर्माण की चुनौती
पितकी ओवरब्रिज का निर्माण तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण रहा। चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर बन रहे चार ओवरब्रिज में पितकी का काम सबसे कठिन माना गया, क्योंकि यहां तीन रेलवे ट्रैक हैं। इनमें एक ट्रैक बाकी दो से काफी दूरी पर है, जिसके कारण ओवरब्रिज की लंबाई भी अधिक रखनी पड़ी।
वहीं, निर्माण स्थल से करीब 500 मीटर की दूरी पर चांडिल जंक्शन होने के कारण रेलवे ट्रैक के ऊपर स्टील गार्डर लॉन्चिंग का काम भी बेहद सावधानी से करना पड़ा। ट्रेनों का परिचालन लंबे समय तक रोकना संभव नहीं था, इसलिए रेलवे और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ काम पूरा किया गया।
👷 संजय सेठ की निगरानी में तेज हुआ निर्माण
ओवरब्रिज के निर्माण को समय पर पूरा कराने के लिए रक्षा राज्यमंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहे। उनके स्तर से एनएचएआई और रेलवे अधिकारियों के साथ निर्माण कार्य की समीक्षा की जाती रही और निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि अंतिम चरण में भारी बारिश ने एक बार फिर काम की रफ्तार धीमी कर दी, लेकिन दोबारा मेटेरियल बिछाने और कालीकरण समेत जरूरी कार्य पूरा कर अब ओवरब्रिज को लोकार्पण के लिए तैयार कर लिया गया है।
🎯 22 अगस्त का इंतजार खत्म
पितकी रेलवे ओवरब्रिज के लोकार्पण के साथ ही वर्षों पुरानी जाम की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। 22 अगस्त को ओवरब्रिज के खुलते ही चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा और कोल्हान से पश्चिम बंगाल तक सफर करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
पितकी का ओवरब्रिज सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि रोजाना जाम में फंसने वाले हजारों यात्रियों के लिए राहत का नया रास्ता साबित होने वाला है।

