NEWS LAHAR REPORTER
साकची हावड़ा ब्रिज बना जलजमाव का आईना, सड़क पर बहता पानी और परेशान लोग; सवाल—आखिर कहां गई करोड़ों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था?
*जमशेदपुर।* राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता में तीसरा स्थान हासिल करने वाले जमशेदपुर की तस्वीर शुक्रवार की तेज बारिश ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। *साकची हावड़ा ब्रिज के नीचे का यह वीडियो* शहर की जमीनी हकीकत को सामने रख रहा है, जहां मूसलाधार बारिश के बीच सड़क पर पानी का तेज बहाव नजर आ रहा है। वाहनों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है और पैदल राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में जमशेदपुर को 3 से 10 लाख आबादी वाली श्रेणी में देश में *तीसरा स्थान* मिला था। शहर को 5-स्टार Garbage Free City का दर्जा भी मिला।
लेकिन बारिश के दौरान सामने आई यह तस्वीर शहर की *जलनिकासी व्यवस्था, सड़क प्रबंधन और सफाई व्यवस्था* को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल
साकची हावड़ा ब्रिज के नीचे भारी बारिश के बाद सड़क पर जिस तरह पानी का बहाव दिखाई दे रहा है, उससे साफ है कि तेज बारिश के दौरान इलाके की जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। वीडियो में लोग पानी के बीच से गुजरते दिखाई दे रहे हैं, जबकि वाहन भी जलजमाव के बीच आगे बढ़ने को मजबूर हैं।
यह सिर्फ एक सड़क पर पानी भरने का मामला नहीं है। सवाल यह है कि जिस शहर को देश के स्वच्छ शहरों की सूची में तीसरा स्थान मिला है, वहां *बारिश के दौरान जलनिकासी की ऐसी स्थिति क्यों बन रही है?*
Tata Steel और JNAC की व्यवस्था पर उठे सवाल
जमशेदपुर की सफाई और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था में *Tata Steel तथा JNAC* की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर के प्रदर्शन को लेकर Tata Steel और उसकी सहयोगी कंपनी TSUISL की भूमिका भी रिपोर्ट की गई है।
ऐसे में बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी और बहते गंदे पानी की तस्वीरें व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार संस्थानों के सामने कई सवाल खड़े करती हैं।
*क्या सिर्फ कचरा उठाने और सड़क साफ रखने से शहर स्वच्छ कहलाएगा?*
या फिर स्वच्छ शहर की परिभाषा में *बेहतर ड्रेनेज, बारिश के पानी की निकासी, जलजमाव से राहत और सुरक्षित आवागमन* भी उतना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए?
पुरस्कार अपनी जगह, जमीनी हकीकत अपनी जगह
जमशेदपुर को मिला राष्ट्रीय सम्मान निश्चित रूप से शहर के लिए उपलब्धि है। लेकिन बारिश के दौरान सामने आने वाली समस्याएं यह भी बताती हैं कि स्वच्छता के साथ-साथ *शहरी आधारभूत ढांचे और जलनिकासी व्यवस्था* को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
क्योंकि आम लोगों के लिए शहर की असली परीक्षा किसी पुरस्कार समारोह में नहीं, बल्कि *बारिश के दौरान सड़कों पर* होती है।
अगर कुछ घंटों की तेज बारिश में प्रमुख सड़कें जलमग्न हो जाएं और लोगों को घुटने या उससे अधिक पानी के बीच आवागमन करना पड़े, तो यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय जरूर बनता है।
जनता पूछ रही है—आखिर जिम्मेदार कौन?
साकची हावड़ा ब्रिज का यह वीडियो अब सवाल छोड़ रहा है—
*क्या शहर की नालियों और ड्रेनेज की नियमित सफाई हुई थी?*
*क्या बारिश से पहले जलनिकासी व्यवस्था की तैयारी की गई थी?*
*क्या संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां पहले से इंतजाम किए गए थे?*
*और सबसे बड़ा सवाल—बारिश में जलजमाव के लिए जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?*
जमशेदपुर को स्वच्छता में मिला तीसरा स्थान सम्मान की बात है, लेकिन शहरवासियों को अब ऐसी व्यवस्था भी चाहिए जिसमें *बारिश के बाद सड़कें तालाब न बनें और लोगों को पानी के तेज बहाव के बीच रास्ता न तलाशना पड़े।*
*साकची हावड़ा ब्रिज का यह वीडियो इसी अंतर को सामने रखता है—कागज पर स्वच्छता का सम्मान और बारिश में सड़क की जमीनी तस्वीर।

