NEWS LAHAR REPORTER
New Delhi: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन मिश्रा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि देश में करीब 35 से 40 प्रतिशत वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां हो सकती हैं। उनका कहना है कि कई लोग मनगढ़ंत डिग्री सर्टिफिकेट के आधार पर अदालतों में वकालत कर रहे हैं, जिससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब वकीलों की डिग्रियों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई, तब बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए फॉर्म नहीं भरे। लगभग 40 प्रतिशत वकीलों द्वारा फॉर्म नहीं भरना गंभीर चिंता का विषय है और इससे उनके प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर संदेह बढ़ गया है।
मनन मिश्रा ने कहा कि बार काउंसिल इस मामले को गंभीरता से देख रही है और फर्जी डिग्री के जरिए प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए सत्यापन प्रक्रिया जरूरी है।
फिलहाल इस बयान के बाद वकीलों की डिग्री सत्यापन और फर्जी प्रमाणपत्रों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

