NEWS LAHAR REPORTER
जमशेदपुर : जमशेदपुर में बड़ा जीएसटी घोटाला हुआ है। इसका मास्टरमाइंड फर्जी पत्रकार विनोद सिंह फंस गया है। अब जांच होगी। इससे विनोद सिंह तिलमिला गया है। अब वह बचने के लिए हाथ पैर मार रहा है।
भुइयांडीह निवासी महेश कुमार ने अपने भाइयों पर करीब 17 वर्षों तक परिवार के शादी-पार्टी और कैटरिंग कारोबार में काम कराने के बावजूद कमाई में उचित हिस्सा नहीं देने और आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। महेश ने 3 जून 2026 को अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा, पूर्वी सिंहभूम के पदाधिकारियों को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और अपने हिस्से का हिसाब दिलाने की मांग की है।
महेश के मुताबिक परिवार में वर्ष 2009-10 के आसपास शादी-पार्टी और खाद्य कारोबार शुरू हुआ था। उस समय उनकी उम्र करीब 15 वर्ष थी। उनका दावा है कि वह सुबह पांच बजे से देर रात तक गोलगप्पा, टिक्की, चाट, चिल्ला सहित अन्य खाद्य सामग्री तैयार करने, सामान की व्यवस्था करने और विभिन्न आयोजनों में काम करते थे। उनका कहना है कि शुरुआत में परिवार की आमदनी को सदस्यों के बीच बराबर बांटने की बात कही गई थी।
आवेदन में महेश ने आरोप लगाया है कि कारोबार बढ़ने के बाद भी उन्हें आय-व्यय का नियमित हिसाब नहीं दिया गया। उनका दावा है कि कारोबार की रकम परिवार के सदस्यों से जुड़े बैंक खातों में जमा होती रही। उन्होंने कारोबार से अर्जित रकम से जमीन-जायदाद खरीदे जाने का भी आरोप लगाया है और मांग की है कि संपत्ति खरीद में व्यवसाय की कमाई के इस्तेमाल की जांच की जाए।
नौकरी की तैयारी के लिए कारोबार से हटने पर बढ़ा विवाद
महेश का कहना है कि लगातार काम करने के कारण उनकी पढ़ाई और सरकारी नौकरी की तैयारी प्रभावित हो रही थी। वर्ष 2019 में उन्होंने कारोबार से कुछ समय का विराम लेकर नौकरी की तैयारी करने की इच्छा जताई, जिसके बाद परिवार में विवाद बढ़ गया। उनका दावा है कि वह सेना में भर्ती होना चाहते थे और सीआरपीएफ तथा सीआईएसएफ की लिखित एवं शारीरिक परीक्षा भी पास कर चुके थे।
उनके अनुसार कारोबार से अलग होने के बाद जब उन्होंने अपने हिस्से की रकम का हिसाब मांगा तो विवाद और बढ़ गया। उन्होंने घर से निकालने, घरेलू खर्च और बिजली-पानी के बिल को लेकर विवाद तथा अन्य तरह के दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए हैं।
मानसिक प्रताड़ना के भी लगाए आरोप
महेश ने आवेदन में परिवार के सदस्यों पर मानसिक रूप से परेशान करने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कई बार कमरे का दरवाजा बंद कर दिया जाता था, कपड़े हटा दिए जाते थे, वाहन की चाबी छिपा दी जाती थी और देर रात लौटने पर घर का गेट खोलने में देरी की जाती थी। उन्होंने गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार के भी आरोप लगाए हैं।
ढाई लाख रुपये देकर पूरा हिसाब होने का दावा
महेश का कहना है कि वर्षों तक कारोबार में काम करने के बाद उन्हें करीब ढाई लाख रुपये देकर यह कह दिया गया कि उनका पूरा हिसाब कर दिया गया है। वह इस रकम को अपने वर्षों के श्रम और कारोबार में हिस्सेदारी की तुलना में अपर्याप्त मानते हैं। उन्होंने समाज के पदाधिकारियों से पुराने बिल-बही, बैंक स्टेटमेंट और कारोबार से संबंधित अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
महेश ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके भाई कृष्णा साहू के पास जीएसटी पंजीकरण नहीं है। उन्होंने कारोबार की वैधता, आय और कर संबंधी दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
पुरानी बैठकों का भी किया उल्लेख
महेश ने आवेदन में वर्ष 2019, 2020 और 2022 में परिवार, रिश्तेदारों तथा समाज के लोगों की मौजूदगी में हुई बैठकों का उल्लेख किया है। उनका दावा है कि कई बार बातचीत के बावजूद कारोबार की आय और उनके हिस्से का स्पष्ट हिसाब नहीं कराया गया।
उन्होंने वर्ष 2022 की एक बैठक को लेकर भी आरोप लगाए हैं। महेश के अनुसार उस दौरान उन पर शादी करने के लिए दबाव बनाया गया और आर्थिक मांग भी की गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है।
आर्थिक संकट और इलाज का भी हवाला
महेश ने अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया है कि वह फिलहाल डिलीवरी का काम कर जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और इलाज के लिए आर्थिक कठिनाई होने की बात भी आवेदन में कही है। उनका दावा है कि पिछले कई वर्षों से पारिवारिक विवाद के कारण वह आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से गुजर रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और उचित हिस्से की मांग
महेश ने तैलिक साहू महासभा से कारोबार शुरू होने से लेकर अब तक की आय, खर्च, बैंक लेनदेन और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि कारोबार की कमाई में उनका हिस्सा साबित होता है तो उन्हें उचित हिस्सा दिलाया जाए। साथ ही उन्होंने इलाज और तत्काल जीवन-यापन के लिए आर्थिक सहायता की भी अपील की है।
महेश ने अपने आवेदन में कुछ अन्य व्यक्तियों के संबंध में भी आरोप लगाए हैं। इनमें पत्रकार विनोद सिंह को लेकर भी गंभीर आरोप शामिल हैं। महेश के आवेदन में यदि इन आरोपों का उल्लेख है तो उनकी स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही उन्हें समाचार में तथ्य के रूप में प्रकाशित किया जाना उचित होगा। फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर विनोद सिंह के खिलाफ कथित जांच शुरू होने, कथित जीएसटी घोटाले में फंसने या उनके पत्रकारिता की आड़ में दलाली करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

