NEWS LAHAR REPORTER
जमशेदपुर : सरायकेला नगर पंचायत में पदस्थापित कार्यपालक पदाधिकारी समीर बोदरा पर दुष्कर्म का आरोप लगने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले में प्राथमिकी दर्ज होने और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद तीन महीने बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे चाईबासा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
फरवरी में कोर्ट में दर्ज कराई गई थी शिकायत
जानकारी के अनुसार कुमारडुंगी निवासी एक महिला ने 28 फरवरी 2026 को चाईबासा न्यायालय में समीर बोदरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के लिए चाईबासा महिला थाना को भेज दिया था। कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
जांच के दौरान पुलिस की विशेष टीम कई बार सरायकेला और पीड़िता के पैतृक गांव पहुंचकर साक्ष्य जुटा चुकी है। सदर महिला थाना, चाईबासा में कांड संख्या 03/2026 के तहत समीर बोदरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपों में दुष्कर्म, शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण, धोखाधड़ी, अपहरण, आपराधिक षड्यंत्र और धमकी देने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार
मामले में न्यायालय द्वारा समीर बोदरा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी की आशंका के चलते वह फरार चल रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 की कंडिका-9 तथा झारखंड सेवा संहिता के नियम-100 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उपायुक्त कार्यालय, सरायकेला-खरसावां निर्धारित किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
एफआईआर दर्ज होने के करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

