NEWS LAHAR REPORTER
हर साल बारिश में 72 घंटे तक टापू बन जाते हैं आधा दर्जन गांव, ग्रामीणों ने सांसद विद्युत वरण महतो और बीडीओ को सौंपा ज्ञापन
जादूगोड़ा। मुसाबनी प्रखंड क्षेत्र में बागजाता यूरेनियम प्रोजेक्ट को जोड़ने वाली जर्जर पुलिया अब हादसे को न्योता दे रही है। वर्ष 2003 में यूसिल प्रबंधन द्वारा निर्मित इस पुलिया में जगह-जगह दरार पड़ गई है और रेलिंग भी टूट चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि अगली बरसात में तेज पानी की धार के बीच पुलिया के बह जाने का खतरा बना हुआ है।
पुलिया की जर्जर स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता हरिपद भकत की अगुवाई में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुसाबनी प्रखंड विकास पदाधिकारी अदिति गुप्ता तथा सांसद विद्युत वरण महतो को ज्ञापन सौंपकर पुलिया एवं सड़क के निर्माण की मांग की।
पुलिया में दरार, टूटी रेलिंग से बढ़ा खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि लाटिया-डुंगरीडीह गांव को जोड़ने वाली बागजाता यूरेनियम प्रोजेक्ट की पुलिया काफी जर्जर हो चुकी है। पुलिया में दरार पड़ने के साथ रेलिंग भी टूट गई है। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों और वाहन चालकों पर हर समय हादसे का खतरा मंडरा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता हरिपद भकत ने मांग की कि बागजाता यूरेनियम माइंस से सटे शंख नदी पर बाकड़ा एवं फुलझड़ी के बीच स्थित जर्जर पुलिया का नए सिरे से निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूर्व में घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन को भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
हर बरसात में आधा दर्जन गांव बन जाते हैं टापू
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2003 में यूसिल प्रबंधन ने यूरेनियम अयस्क की जादूगोड़ा तक ढुलाई के उद्देश्य से ग्रामीणों के सुझाव के बावजूद छोटी पुलिया का निर्माण कराया था। पिछले करीब दो दशकों से हर साल बरसात के दौरान यह पुलिया पानी में डूब जाती है।
पुलिया के डूबने से आसपास के आधा दर्जन गांव करीब 72 घंटे तक टापू में तब्दील हो जाते हैं। इस दौरान अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने का रास्ता बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है और लोगों की जिंदगी भगवान भरोसे हो जाती है।
सांसद से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद
ग्रामीणों ने सांसद विद्युत वरण महतो से जर्जर पुलिया और सड़क की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्माण कराने की मांग की है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या के समाधान के लिए सांसद और संबंधित विभाग कितनी सक्रियता दिखाते हैं।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व पंचायत समिति सदस्य हरिपद भकत, मुखिया पर्वत हांसदा, भागीरथ कैवर्त, मथुरा कैवर्त, सुखराम मुर्मू, फुदान मुर्मू, पराव मुर्मू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।

