जमशेदपुर: एक जनवरी 1948 को हुए ऐतिहासिक खरसावां गोलीकांड के शहीदों को चिन्हित करने की दिशा में झारखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शहीदों की खोज और पहचान के लिए न्यायिक जांच आयोग के गठन का मसौदा तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को खरसावां शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सभा को संबोधित करते हुए यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री के साथ मंत्री दीपक बिरुवा, चक्रधरपुर विधायक सुरखराम उरांव और ईचागढ़ विधायक सविता महतो भी मौजूद रहीं। शहीद स्मारक समिति की ओर से मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खरसावां गोलीकांड के शहीदों को खोज-खोज कर सम्मान दिया जाएगा। इसके लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाएगा, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आयोग के मसौदे का प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं से अध्ययन किया जा रहा है और पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद इसे मंजूरी दी जाएगी। अगले वर्ष शहीद दिवस से पहले शहीदों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनवरी पूरी दुनिया के लिए नया साल है, लेकिन झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, किसान और मजदूरों के लिए यह शहीद दिवस है। उन्होंने झारखंड के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा की रक्षा के लिए यहां के वीर सपूतों ने बलिदान दिया है। खरसावां गोलीकांड इसी संघर्ष की सबसे बड़ी मिसाल है, जिसे दूसरा जलियांवाला बाग भी कहा जाता है।
सीएम ने पेसा एक्ट लागू होने, आदिवासी जमीन की सुरक्षा, सोलर ऊर्जा से आय, शिक्षा के विस्तार, गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना और मइयां सम्मान योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन और सिद्धू-कान्हू को नमन करते हुए झारखंड को अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।
इसके बाद खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि आजादी के साढ़े चार महीने बाद हुए इस गोलीकांड में अब तक सभी शहीदों की पहचान नहीं हो सकी है। उन्होंने शहीदों के चिन्हीकरण का काम दोबारा शुरू करने और झारखंड के बाहर के शहीदों को भी पहचान देने की मांग रखी।
बताते हैं कि आजादी के बाद खरसावां को ओडिशा में मिलाने के फैसले के विरोध में आदिवासियों ने आंदोलन किया था। एक जनवरी 1948 को साप्ताहिक हाट के दिन शांतिपूर्ण भीड़ पर तत्कालीन ओडिशा पुलिस ने मशीनगन से गोली चला दी थी, जिसमें कई लोग शहीद हुए थे। तब से हर साल एक जनवरी को खरसावां में शहीद दिवस मनाया जाता है।

